मैजेस्टिक ह्यूमन कॉमदी की कहानी
मैं जुसेप्पे को घेरना चाहता था, या मालूम नहीं खुद को सिर के बल खड़ा करके एक ऐसी चीज़ समझने की कोशिश कर रहा था जिस कहन के समझने के दिन अब बीती-बिसरायी हुई, क्योंकि सचमुच अब कौन पढ़ता है उपन्यास? किताब की दुकानों में और कुछ खुशहाल घरों की अलमारियों में...
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Pramod Singh
जुसेप्पे से जिरह
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[20 May 2010 04:43 AM]



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