प्यासी धरती - प्यासे मन!

hindigen बंजर धरती दरकन माटी की,दरका देती हैदिल सैकड़ों के.पर क्या करते?गर आंसुओं से बुझती प्यास हर आँखइतना रोती औ'नीर बहा देती, प्यास से पपड़ाये होंठों की प्यासशीतल कर देती.मन में उमड़ते विचारों के बादल इतना बरसातीआकाश में उठी... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव

kavita

views
13
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
6
[20 May 2010 04:36 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix