नेताजी का अरमान
नेता-अभिनेता दोनोंहो गए एक समानमंचों पर बैठकर गायेंएक दूजे का गान।चिकनी चुपडी़ बातें करेंखूब करें अपना बखानजनता का धन खूब लूटेंगायें मेरा भारत महान।मँहगाई, बेरोजगारी खूब फैलेनेताजी सोते चद्दर तानखुद खाएं मुर्ग मुसल्लमजनता भुखमरी से परेशान।कभी आंतक, कभी...
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Akanksha~आकांक्षा
कविता
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[20 May 2010 03:57 AM]



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