‘अभी-अभी’ से ’कभी-का’ तक....

मौन में बात.. ‘अभी-अभी’ से ’कभी-का’ तक....सूरज ने कहा कि ’देर रात की बात थी। हम सब घबरा गए थे। कुछ समझ में नहीं आया क्या करें। तू समझ रहा है ना?’मैं नहीं समझ रहा था। बहुत धुंधला सा सूरज दिख रहा था उसके चहरे पर मूछ नहीं थी। मैंने दो बार ज़बान पलटानी चाही कि उससे पूछू... [पूरी पोस्ट]
writer मानव

कहानी...

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[20 May 2010 03:12 AM]

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