देश तो साला जैसे सुबह का अख़बार हो गया
व्यंज़ल देश तो साला जैसे सुबह का अख़बार हो गया वो तो एक नॉवेल था कैसे अख़बार हो गया तमाम जनता ने लगा लिए हैं मुँह पे भोंपू मेरा शहर यारों कुछ ऐसे अख़बार हो गया दुश्वारियाँ मुझपे कुछ ऐसी गुजरीं कि मैं एक कॉलम सेंटीमीटर का अख़बार हो गया लोगों ने कर डाली...
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Raviratlami
व्यंग्य
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[20 May 2010 01:30 AM]



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