मेरा क्या कसूर ?
हक़ की हुंकार लगाते हैंहक़ का जो शोर मचाते हैंवे ज़ोर-ज़ोर चिल्लाते हैंउन मासूमों को, निर्दोषों को जन-जन को मारे जाते हैंजिन आदिवासी और दलित वर्ग के अधिकारों का युद्ध बतलाते हैंकभी उनके घर ये जाते हैं ?उन अबलाओं की, मासूमों की आंखों के निश्छल आंसूक्या इनके...
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रवीन्द्र गोयल्
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[20 May 2010 01:04 AM]



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