रँग सारे भरती

गीत-ग़ज़ल इतना चुभते से क्यों हैं रेशमी धागेअपनी चलती नहीं है कुछ भी उसके आगेमेरे काढ़े कसीदे नहीं कढ़तेमेरे यत्नो से फूल नहीं खिलतेहाथ लगते ही तेरा ये क्या होताअरमानों के दीप सारे जलतेडोरी रेशमी है क्यों चुभतीतिल्लेदार है आँखों में रमतीजरीदार , चटख ,... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[20 May 2010 00:56 AM]

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