मैनें कोई पाप नहीं किये हैं कि लोगों को पानी पिलाकर पुण्य कमाता फिरूं
मेरे कस्बे सांपला के रेलवे स्टेशन से लगता हुआ कुंआ होता था (अब सूख चुका है)। दिल्ली से हिसार तक की रेल सवारियां इसी पर पानी पीती थी। रेल गाडियों को भी यहां अपेक्षाकृत ज्यादा देर तक इसी कारण से रोक कर रखा जाता था। हम छोटे-छोटे 25-30 बच्चों का समूह हर रोज...
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अन्तर सोहिल
स्टेशन
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[20 May 2010 00:30 AM]



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