चाणक्य नीति दर्शन-अपने गुणों की स्वयं प्रशंसा करना अज्ञान का प्रमाण (khud ki taarif agyan ka praman-chankya neeti)
पर-प्रोक्तगुणो वस्तु निर्गृणऽपि गुणी भवेत्।इन्द्रोऽ लघुतां याति स्वयं प्रख्यापितैर्गृणैः।।हिन्दी में भावार्थ-चाहे कोई मनुष्य कम ज्ञानी हो पर अगर दूसरे उसके गुणों की प्रशंसा अन्य लोग करते हैं तो वह गुणवान माना जायेगा किन्तु जो पूर्ण ज्ञानी है और...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[19 May 2010 23:32 PM]



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