.....और गज़ल कहे कोई
दिल गमों से चूर होऔर गज़ल कहे कोईदर्द को छिपा ले कलेजे मेंऔर गज़ल कहे कोईसौ तल्खियाँ हो चेहरे पेऔर गज़ल कहे कोईख़लिश न मिटती हो दिल कीऔर गज़ल कहे कोईलरज़ते ज़ख्म हो दिल केऔर गज़ल कहे कोईटूटते लफ़्ज हो जुबाँ पर और गज़ल कहे कोईबहुत कहने को हो अरमाँऔर गज़ल...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. राजेश नीरव
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[19 May 2010 23:11 PM]



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