भर्तृहरि नीति दर्शन-ज्ञान का अहंकार मनुष्य को मदांध बना देता है (gyan ka ahankar-hindu dharma sandesh)

शब्दलेख सारथी यदा किंचिज्ज्ञोऽहं द्विप इव मदान्धः समभवम्तदा सर्वज्ञोऽस्मीत्यभवदवलिपतं मम मनःयदा किञ्चित्किाञ्चिद् बुधजनसकाशादवगतम्तदा मूर्खोऽस्मीति जवन इव मदो में व्यपगतःहिंदी में भावार्थ -जब मुझे कुछ ज्ञान हुआ तो मैं हाथी की तरह मदांध होकर उस पर गर्व करने लगा और अपने... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिंदू-धर्मं

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[19 May 2010 23:10 PM]

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