किताबे पढ रहा हूँ ....फिलहाल ब्लॉगजगत ठेलायमान है.....सतीश पंचम
किताबों पर वक्त लगा रहा हूँ....फिलहाल तो मुझपर पुन्नी सिंह रचित 'तोर रूप गजब' किताब अपने जलवे बिखेर रही है ....एक सूकून मिलता है ऐसी किताबों को पढने से। छत्तीसगढ की पृष्ठभूमि पर एक कस्बाई कॉलेज में...
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सतीश पंचम
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[19 May 2010 21:49 PM]



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