बहता दरिया है शब्दों का!!

उडन तश्तरी  .... जबलपुर प्रवास में शायद ही कोई ऐसा सप्ताह गुजरता हो जब हमारी और बवाल की अकेले महफिल न जमें. फिर लगभग हर दूसरे तीसरे दिन कहीं न कहीं महफिल जमीं रहती, कभी लोक गीतों की, कभी गज़लो की तो कभी कव्वालियों की तो कभी कविताओं की, उसमें तो खैर बवाल और संजय तिवारी... [पूरी पोस्ट]
writer Udan Tashtari

कविता

views
117
upvote
13
downvote
1
rating
12
comments
25
[19 May 2010 21:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix