आओ थोडा सा रूमानी हो जाये! ना...ना...ताऊ
कल शाम मैं भजल लिखने की कोशीश कर रहा थाआओ थोडा सा रूमानी हो जाये,अकड कर ट्रक की कमानी हो जायेथोडा सा टंकी चढा ब्लागर हो जायेंमौज लेने में डाक्टरेट कर जायें ...आज भजल बन नही रही थी.... कि इतनी देर में ताऊ की आवाज आई...अबे बावलीबूच रामप्यारे...रुमानी और...
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ताऊ रामपुरिया
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[19 May 2010 19:14 PM]



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