संजीदा और हाजिरजवाब राजनेता थे शेखावत
उमेश चतुर्वेदीवह 2002 के जाड़ों की एक दोपहर थी...दिल्ली में शीतलहर अपने पूरे उफान पर थी। तब उपराष्ट्रपति भवन से इन पंक्तियों के लेखक को भी बुलावा आया था। दरअसल हमारे एक मित्र के पिता की किताब का विमोचन तब के उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत के हाथों होना...
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उमेश चतुर्वेदी
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[19 May 2010 12:50 PM]



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