क्यों चाहता है वो ! हर बार ये जीवन
जीवन एक अपार सच्चाईकुछ जुड़े हुए नए से ख्वाब कुछ टूटे हुए खाली लम्हे सबकुछ पाकर भी कुछ न पाया सबकुछ खोकर भी कुछ न खोया हर शब्द का झंकार ये जीवन वीणा की रग का हर तार ये जीवनकुछ बसा हुआ कुछ उजड़ा ये जीवन हर एक साँस में बसा जीवन हर एक साँस पर मरा जीवन कुछ...
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aarya
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[19 May 2010 11:55 AM]



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