सरकारों के लिए नक्सलियों से लडऩा मजबूरी है, कोई शौक नही

अग्रदूत बात तो उसी से की जा सकती है जो बात करना चाहे। चिदंबरम तो कई बार कहचुके हैं कि 72 घंटे के लिए हिंसा बंद करें तो वार्ता हो सकती है। 72घंटे होते ही कितने हैं। मात्र 3 दिन 3 रात। नक्सलियों के पास बातचीत काकोई प्रजातांत्रिक मुद्दा हो तब न वे बात करें। बारूद,... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु सिन्हा

हिंसा

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[19 May 2010 11:33 AM]

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