अहा !
अहा ! कितनी प्यारी–सी लड़कीजो मिली थी मुझे घूरे परमृत-अजन्मीपर फिर भी मैंनेउसे उठाया औरतब आँख खोल वह मुस्काईजिसमें थीं अनंत सम्भावनाएँ….मैंने चूम ली उसकीअर्ध विकसित नाक और ली ढेर सारी मुफ़त की मिठ्ठियाँउसने पकड़ लिया मेरा चश्मा और खिलखिला उठी,लोग अब...
[पूरी पोस्ट]
Amitraghat
14
4
0
4
11
[19 May 2010 09:05 AM]



Shuffle








