मै अबला हूँ!!!

चिंतन मेरे मन का मैं अबला हूँसदियो से हारती आई हूँयही हम कहते आये है। मुझे हर पल कोसा गयामेरे अर्थ को निर्थक कियायही हम कहते आये है। वेदना ही मेरा अस्तित्व हैहर पल मुझ पर जुल्म हुयेयही हम कहते आये है। दुर्गा हो या पार्वतीगाते सब मेरी आरतीकहो कौन जीता कौन हारा? सीता हो या... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[19 May 2010 08:53 AM]

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