“वो पुरानी खिड़की”-1

MERE SAPNE MERE APNE अब आगे.........जेठ के महीने की चिलचिलाती धूप में भी वो हौसला दिखाते हुए मुझसे मिलने पहुंच ही जाती थी मेरे तपते हुए कमरे में। उसके पत्थर फेंकने पर मैं धीरे से बिना आवाज़ किए सीढ़ी नीचे उतार देता और फिर हम दोनों घंटों बैठकर बातें करते रहते थे। कभी इतिहास... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj

कहानी

views
16
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
3
[19 May 2010 08:09 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix