हजपुरा
....मैं उन यादों को लिख रहा हूँ .....जो मेरे बचपने की वह हैं .......जिनसेमेरे जीवन का रूप -रंग बदला ....मेरी माँ पे ....देवी माँ का साया था .....जब उन पर आता थातब वह क्या क्या बोलती थी ......मुझे याद नहीं है ....पर वह भय...आज तक ,मेरे अंदर छिपा बैठा है...
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भंगार
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[19 May 2010 07:46 AM]



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