सिंगार बन तू ख़ल्क का तो खालिकी मिल जायेगी
अदावत नहींआदावत की बात कर अलगाव की नहीं आ लगाव की बात कर नफ़रत नहींतूउल्फ़त की बात करबात कर रूमानियत कीमैं सुनूंगाबात कर इन्सानियत कीमैं सुनूंगामैं न सुन पाऊंगा तेरी साज़िशेंरंजिशें औ खूं आलूदा काविशेंकिसने सिखलाया तुझे संहार कर !कौन कहता है कि पैदा खार...
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[19 May 2010 07:01 AM]



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