हमें अपना हुनर मालूम है

abhivyakti एक चाँद ही को पाने का न सोचा हमने वर्ना हर एक सितारे क़ी चाहत रही वो टूटे तो घूरा गुस्से से आसमान को क़ि क्यूँ न संभाल सका वो हमारे प्यार को वो टिमटिमाये तो दुआओं में भीउनकी ही वफा मांगी  सिर्फ उगते... [पूरी पोस्ट]
writer हिमानी
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[19 May 2010 06:42 AM]

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