प्रगति के नए प्रतिमान

विचार-बिगुल प्रगति के नए प्रतिमान बंधू आगे बढ़ता चल,सबका माल पचाता चलअगर तरक्की करनी है तोटंगड़ी मार गिराता चलसच्चाई को आग लगा दे,भाईचारे को दफना दे उन्हें डुबोकर बीच भंवर मेंअपनी कश्ती पार लगा लेझूठ फरेबों की नदियाँ मेंगोते खूब लगाता चल.........अगर कवि बनना है... [पूरी पोस्ट]
writer Dr M.S. Parihar
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[19 May 2010 05:06 AM]

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