आओ चलो बोएं ……..
आओ चलो बोएं संवेदना के बीज खेतों में नहीं पगडंडियों के किनारे,बगीचों में …. जहाँ सैर करने निकलते हैं लोग सुबह-शाम और सबसे पहले तो अपने-अपने आँगन में लगी तुलसी के घरुए में अंकुरण से फैलेगी वो खुशबु, वो महक जो दिल ओ दिमाग के पर्यावरण को रखेगी मुक्त...
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Dr. Veena Srivastava
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[19 May 2010 03:52 AM]



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