स्पष्ठीकरण !
इर्द-गिर्द सदा ही घूम पाता, मैंने तोतुमसे वो धूरी माँगी थी, दूरी नहीं,दिल की बात हम हक़ से कह जाते,वो सहभागिता माँगी थी, मजबूरी नहीं !मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है,हर ख्वाब दिल के कोने में सजाता हूँ,इजहार-ए-इश्क मेरी पलकें कर लेती है ,हर बात लबों पे...
[पूरी पोस्ट]
पी.सी.गोदियाल
my lyrics
43
5
1
4
23
[19 May 2010 03:10 AM]



Shuffle








