मिट्टी के कोरे कूंडे टंगे हैं...

Firdaus's Diary गरमी से बेहालप्यासी चिड़ियों के लिएघने दरख्तों की शाख़ों परठंडे पानी से भरे मिट्टी के कोरे कूंडे टंगे हैं...किसी न ख़त्म होने वालेसवाब की तरह...-फ़िरदौस ख़ान... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान

गौरैया

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[19 May 2010 00:52 AM]

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