() सतरंगी हुए सपने मेरे ()
सतरंगी हुए सपने मेरे,जब से पड़े हैं कदम तेरे,जीवन से मिटे हैं अँधेरे,रातों को मिले ज्यों सबेरे,और मधुमय हुए हैं बसेरे,डाले खुशियों ने मन में डेरे...सतरंगी हुए सपने मेरे,जब से पड़े हैं कदम तेरे....करवट बदली इस जिंदगी ने,और आखें खोली पलकों ने,ख़ुशी मन में...
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Jayant Chaudhary
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[19 May 2010 00:28 AM]



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