नवगीत: मुँह में नहीं जुबान...... --संजीव 'सलिल'
नव गीत:संजीव वर्मा 'सलिल' मौन देखकरयह मत समझोमुँह में नहीं जुबान...*शांति-शिष्टता,धैर्य-भद्रता,जीवट की पहचान.शांत सतह के नीचे हलचल,मचल रहे अरमान.श्वेत-शयन लख यह मत समझो रंगों से अनजान. मौन देखकर यह मत समझोमुँह में नहीं जुबान...*ऊपर-नीचे सब जानें पर...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
contemporary hindi poetry
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[19 May 2010 00:00 AM]



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