सखी न कुछ भी भाता आज !

Unmanaa सखी न कुछ भी भाता आज ! गुंजित मधुर कूक कोयल की, मादक अलियों का सरसाज ! सखी न कुछ भी भाता आज ! आज न भाता मदिर भाव से प्रमुदित ऊषा का आना,आज न भाता मृदु मलयानिल का सुमनों को छू जाना,अरी न भाती चंद्र ज्योत्सना और न रजनी का प्रिय साज ! सखी न कुछ भी भाता आज !... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
views
12
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
7
[18 May 2010 21:01 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix