एक जख्म दे जाते है ..........
वो हर रोज एक जख्म दे जाते है। हम उन जख्मों के सहारे जीते जाते है ॥ मुझे कोरा कागज समझ कर अपने दस्तानेब्यां लिखते है । लिखते लिखते जब वो थक जाते है ।कागज कि टुकड़े टुकड़े कर के चले जाते है ॥ मुझे आइना समझ कर वो अपने दुःख दर्द कहते है , आसुंओं कि बारिश को जब...
[पूरी पोस्ट]
देवेश प्रताप
14
1
0
1
15
[18 May 2010 21:10 PM]



Shuffle








