हिन्दी साहित्य के नाम पर हिन्दी, उर्दू, फारशी, और इंग्लिश की खिचड़ी परोस रहे हैं ब्लॉगर.....'तेज'
कुछ कारण बिना किसी कारण होते हैं पर जब कारण हद से आगे निकल जाये तो उसका बोध कराना जरुरी होता है.कुछ ऐसा ही हो रहा है ब्लोगवाणी पर, कुछ अच्छे लोगों को छोड़ कर बाकी लोग केवल संख्या बढाने के लिए ब्लोगिंग कर रहे हैं.मैं खुद हिन्दी का देवता तो नहीं हूँ पर जो...
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Tej Pratap Singh
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[18 May 2010 16:45 PM]



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