अठारह मई का वह दिन !!!

अनवरत अठारह मई का वह दिन कैसे भूला जा सकता है? दो बरस पहले से जिसे देखने और मिलने की आस लगी थी वह इस दिन पूरी होने वाली थी। हुआ यूँ था ............ गर्मी की छुट्टियां थीं और मौसी की लड़की की शादी। सारा परिवार उस में आया था। सरदार, बाबूजी. माँ, बहनें और... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[18 May 2010 14:29 PM]

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