कौन बेहतर?
अनिल सिन्हावे जो ख़ामोशी से जीते रहे हजारों साल की लीक पर पूजते रहे कभी न दिखाई पड़ने वाले देवताओं को पुरखों की याद में दीप जलाते रहे खेत, जंगल जिन्हें पहचानते थे हवाएं कभी थरथराई नहीं जिनके आने पर या वे ?जिन्होंने कभी शंकाओं को छिपाया नहीं देवताओं से भी...
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pranava priyadarshee
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[18 May 2010 13:36 PM]



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