हिंसा, नक्सलवाद और विकास
छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में फिर खून बहा. इसके पहले तो सुरक्षाकर्मी मारे गए थे, अबकी सामान्य नागरिको की बारी थी. खून किसी का बहे, खून तो खून है. हमारे समाज की समस्या है कि भूख, पेट और राशन पर कई बड़े-बड़े भाषण है परन्तु नेताओं के सांप्रदायिक और जातीय...
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Amar Singh
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[18 May 2010 12:49 PM]



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