सिर्फ़ नाम की "हाऊसफ़ुल" : फ़िल्म समीक्षा , एक आम दर्शक की नज़र से

bihari babu kahin अभी कल परसों ही फ़ैमिली जिद पर अड गई कि पिक्चर देखने जाना है, मुझे सिर्फ़ फ़रमान सुनाया जाता है , पूछा नहीं जाता , सो सब के सब चल दिए , देखने , टिकट मुझे पहले ही लाना पडा , और इसके बाद जुल्म ये कि अगले ढाई तीन घंटे तक पूरी पिक्चर को भी झेलना पडा । बस उसी... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार झा
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[18 May 2010 12:02 PM]

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