यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

Kavi Sammelan मुद्दत के बाद उसने जो की लुत्फ़ की निगाह जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़ेजिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के अश्के-ग़मयूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े रचयिता - कैफ़ी आज़मी प्रस्तुति - अलबेला खत्री... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[18 May 2010 11:59 AM]

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