मन बाबरे

नारी का कविता ब्लॉग © 2008-10 सर्वाधिकार सुरक्षित!आज मन ने मेरी बात मानी है आज समझा है वह,नहीं गँवाएगा समय व्यर्थ की बातें सोचने में,जीवन में ऐसा तो चलता ही रहता है मतभेद, विवाद,अतिवाद, या फिर....यही तो है जीवन !अब मुझे विगत बातों कोकभी नहीं सोचनाकुछ करना है ऐसाजो समाज में... [पूरी पोस्ट]
writer डा.मीना अग्रवाल
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[18 May 2010 11:45 AM]

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