बच्चे की कहानी
देर रात जब झिंगुर अपना हल्ला मचा-मचाकर थक गए होते, और सब तरफ़ सन्नाटा छा जाने के बाद जब जागी आंखों के सपने में कहीं दूर से उठी चली आती मेले की आवाज़ें आत्मा में गड्ढे गोड़ना शुरु करतीं, मैं चिंहुककर और जल्दी-जल्दी अम्मां के पैर दबाने लगता. अम्मां...
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Pramod Singh
साहित्यिक झोला
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[18 May 2010 11:55 AM]



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