खबर...
**सुबह से लेकर रात तक.. भागती रहती है ये जिंदगी ..कभी इस खबर.. कभी उस खबर.. मैं .. बेखबर सा होकर घूमता रहता हूँ..बदबूदार लाशें... नालियों में सड़ती नवजात बेटियाँ... तो बेटो के जन्मोत्सव..चौराहे पर एक कट चाय पीकर... मुई फिर भी कविता लिख लेता हूँ...**...
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विनोद बिश्नोई
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[22 Jan 2010 09:50 AM]



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