मौन का सागर

ऐसा देश है मेरा मौन का सागर बना अपार, मैं इस पार - तू उस पारकहीं तो रोके अहं का कोहरा, कहीं दर्प की खड़ी दीवारशब्दों की नैया को बाँधे, खड़े रहे मंझधार।शाख मान की झुकी नहीं, बहती धारा रुकी नहींकुंठाओं के गहन भंवर में, छूट गई पतवारसुनो पवन का... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद बिश्नोई
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[30 Jan 2010 08:19 AM]

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