वतन बेच देगें।

ऐसा देश है मेरा कली बेच देगें चमन बेच देगें,धरा बेच देगें गगन बेच देगें,कलम के पुजारी अगर सो गये तोये धन के पुजारीवतन बेच देगें।जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" }http://www.janokti.com/... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद बिश्नोई
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[18 Feb 2010 23:26 PM]

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