अरे मेरे महबूब तू है क्या .....
प्रेम पर कुछ कलम चलाने कि कोशिश तो कि...पर देखिये क्या हुआ.... :)जब तुझे पहली बार देखा दिल खुद ब खुद झुक गया...बुतो को पूजने का सिलसिला जाने क्यूँ बस रुक गया....कितनी मिन्नते करता हूँ तो तेरी एक झलक मिलती है...तेरी रहमत पे दिल धड़कता है, मेरी साँसें चलती...
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दिलीप
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[18 May 2010 10:31 AM]



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