अरे मेरे महबूब तू है क्या .....

दिल की कलम से... प्रेम पर कुछ कलम चलाने कि कोशिश तो कि...पर देखिये क्या हुआ.... :)जब तुझे पहली बार देखा दिल खुद ब खुद झुक गया...बुतो को पूजने का सिलसिला जाने क्यूँ बस रुक गया....कितनी मिन्नते करता हूँ तो तेरी एक झलक मिलती है...तेरी रहमत पे दिल धड़कता है, मेरी साँसें चलती... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
views
26
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
24
[18 May 2010 10:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix