आधुनिकता की आँधी में पिसता वय -- (मिथिलेश दुबे)
आधुनिक जीवनशैली और ऊँची आकांक्षाओं के बोझ तले वय बुरी तरह से पिस रहा है । इसके प्रभाव से किशोर वय व लड़के-लड़कियाँ मूल्यो, नैतिकताओं और वर्जनाओं से उदासीन और लापरवाह होते चले जा रहे हैं । जो मूल्य और मानदंड इन्हे विकसीत और सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक होते...
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Mithilesh dubey
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[18 May 2010 10:01 AM]



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