जावेद अख्तर की एक प्यारी सी नज़्म

अपनी, उनकी, सबकी बातें ,अक्सर मेरे एक  ब्लॉग का मूड  दूसरे ब्लॉग पर भी परिलक्षित होता है, 'मन का पाखी' पर  कहानी ने कुछ गंभीर मोड़ लिया तो बैलेंस करने को यहाँ कुछ  हल्का फुल्का लिखना पड़ा.यहाँ निरुपमा के बहाने लड़कियों के प्रति माता-पिता की उदासीनता के विषय... [पूरी पोस्ट]
writer rashmi ravija

नज़्म

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[18 May 2010 09:39 AM]

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