कृत्य है जिनका दानव सा, कहते तुम उनको मानव हो?

Alag sa यह कोई कविता नहीं है, क्योंकि मुझे कविता लिखनी आती ही नहीं, नाही उसकी समझ है। जब दिलो-दिमाग आक्रोशित हों, बेकाबू होती परिस्थितियों से, कुछ ना कर पाने की कशमकश हो, जो कुछ कर पा सकते हैं वे भी आग में आहूती देते दिखें तो ऐसे में उपजे उद्वेग से निकला यह शब्द... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[18 May 2010 09:07 AM]

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