फौज भी लगाना जरुरी हो तो लगाने से चूकना नहीं चाहिए
नक्सलियों ने हिसा और आतंक का एक और काला अध्याय लिख दिया। यात्री बस कोबारुदी सुरंग से उड़ा कर निर्दोष नागरिकों के खून से होली खेल ली। हिंसकजानवर का भी हिंसा से संबंध सिर्र्फ अपनी क्षुधा शांति तक ही रहता है।जानवर तक पेट में भूख न हो तो किसी को मारना पसंद...
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विष्णु सिन्हा
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[18 May 2010 09:03 AM]



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