लेखनी को चाहिए अब अंगार

गीत............... मच   रहा  है चहुँ ओर हाहाकार लेखनी को चाहिए अब  अंगार एक धमाके से कितनी ही जाने हो  रहीं  निसार और कान में तेल दिए बैठी  है सरकार अपने ही कर रहे पीठ  पीछे... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup

कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )

views
29
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
25
[18 May 2010 08:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix