इस ब्लॉगों की महफ़िल में कोई भी हमारा न हुआ...
ओह ब्लागजगत अशांति ही अशांति ...छोटे बड़े सब हलाकान .... बड्डा कौन छोटा कौन... १ नंबर दो नंबर..... बड्डे और छोटे के चेलें आग को हवा देने में लगे है ... कुछ बुजुर्ग समझदार अशांति की आग को फायर बिग्रेड लेकर बुझाने की कोशिश कर रहे हैं .... कई तो शीत युद्ध...
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महेन्द्र मिश्र
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[18 May 2010 07:06 AM]



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