यह जश्न, यह गीत किसी को बहुत हैं…
जो कल तक हमारे लहू की खामोश नदी में तैरने का अभ्यास करते थे.आपने पोस्कोविरोधी आंदोलन पर क्रूरतम पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करती हुई एक अपील हाशिया पर पढ़ी. नीचे हम इस कार्रवाई की एक और भर्त्सना पेश कर रहे हैं.यह टिप्पणी फेलिक्स पाडेल की है. फेलिक्स...
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Reyaz-ul-haque
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[18 May 2010 06:35 AM]



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